श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  1.2.69 
तबे सूत गोसाञि मने पाञा बड़ भय ।
यार ये लक्षण ता हा करिल निश्चय ॥69॥
 
 
अनुवाद
इससे सूत गोस्वामी बहुत चिंतित हो गए। इसलिए उन्होंने प्रत्येक अवतार को उसके विशिष्ट लक्षणों से अलग किया।
 
This made Suta Goswami very apprehensive and he differentiated each incarnation by their specific characteristics.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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