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श्लोक 1.2.62  |
ए - मते नाना - रूप करे पूर्व - पक्ष ।
ताहारे निर्जिते भागवत - पद्य दक्ष ॥62॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार उनके तर्क विभिन्न रूपों में प्रकट होते हैं, किन्तु भागवतम् का काव्य उन सभी का कुशलतापूर्वक खंडन करता है। |
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| Thus their arguments appear in various forms, but the Bhagavata poem refutes them all very skillfully. |
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