श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.2.40 
जीवेर ईश्वर - पुरुषादि अवतार ।
ताँहा सबा हैते तोमार ऐश्वर्य अपार ॥40॥
 
 
अनुवाद
"जीवों के प्रत्यक्ष स्वामी पुरुष अवतार हैं। किन्तु आपका ऐश्वर्य और पराक्रम उनसे कहीं अधिक महान है।"
 
The visible God of living beings is a Purusha incarnate, but Your majesty and power are far greater than His.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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