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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.2.37 
पृथ्वी यैछे घट - कुलेर कारण आश्रय ।
जीवेर निदान तुमि, तुमि सर्वाश्रय ॥37॥
 
 
अनुवाद
“जैसे पृथ्वी सभी मिट्टी के बर्तनों का मूल कारण और आश्रय है, वैसे ही आप सभी जीवित प्राणियों के परम कारण और आश्रय हैं।
 
“Just as the earth is the root cause and support of all earthen vessels (pots), similarly You are the ultimate cause and support of all living beings.
तात्पर्य
जैसे कि विशाल पृथ्वी सभी मिट्टी के पात्रों के लिए तत्वों का स्रोत है, इसी तरह परम आत्मा सभी व्यक्तिगत प्राणियों के पूर्ण पदार्थ का आधार है। सभी कारणों का कारण, भगवान का परम व्यक्तित्व, जीवों का कारण है। इसकी पुष्टि भगवद् गीता (7.10) में होती है, जहां भगवान कहते हैं, बीजां माम सर्व-भूतानाम् (“मैं सभी जीवों का बीज हूं”), और उपनिषदों (कठ उप. 2.2.13) में, जो कहते हैं, नित्यो नित्यानां चेतनश् चेतनानाम् (“प्रभु सभी शाश्वत जीवित प्राणियों में सर्वोच्च नेता हैं”)।

प्रभु सभी ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति, जीवंत और निर्जीव का भंडार है। विशिष्टाद्वैत-वाद दर्शन के समर्थक वेदांत-सूत्र की व्याख्या यह कहते हुए करते हैं कि यद्यपि जीवित प्राणी के पास दो प्रकार के शरीर होते हैं - सूक्ष्म (मन, बुद्धि और झूठे अहंकार से युक्त) और स्थूल (पांच मूल तत्वों से युक्त) - और यद्यपि वह इस प्रकार तीन शारीरिक आयामों (स्थूल, सूक्ष्म और आध्यात्मिक) में रहता है, फिर भी वह एक आध्यात्मिक आत्मा है। इसी तरह, भगवान का परम व्यक्तित्व, जो भौतिक और आध्यात्मिक दुनिया का विस्तार करता है, वह सर्वोच्च आत्मा है। जैसे एक व्यक्तिगत आत्मा आत्मा अपने स्थूल और सूक्ष्म शरीर के लगभग समान होती है, वैसे ही सर्वोच्च भगवान भौतिक और आध्यात्मिक दुनिया के लगभग समान हैं। भौतिक दुनिया, पदार्थ के ऊपर प्रभुता करने की कोशिश करने वाले अनुकूलित आत्माओं से भरी हुई है, सर्वोच्च भगवान की बाहरी ऊर्जा की अभिव्यक्ति है, और आध्यात्मिक दुनिया, भगवान के पूर्ण सेवकों से भरी हुई है, उनकी आंतरिक ऊर्जा की अभिव्यक्ति है। चूंकि सभी जीवित प्राणी भगवान के परम व्यक्तित्व की सूक्ष्म चिंगारियाँ हैं, वह भौतिक और आध्यात्मिक दोनों दुनिया में सर्वोच्च आत्मा हैं। भगवान चैतन्य के बाद वैष्णव अचिंत्य-भेद-तत्व के सिद्धांत पर जोर देते हैं, जो कहता है कि सर्वोच्च प्रभु, हर चीज का कारण और प्रभाव होते हुए भी, उनकी ऊर्जा की अभिव्यक्तियों के साथ एक साथ और उनसे अलग हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)