श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.2.29 
इँहोत द्वि - भुज, तिंहो धरे चारि हाथ ।
इँहो वेणु धरे, तिंहो चक्रादिक साथ ॥29॥
 
 
अनुवाद
इस भगवान [श्रीकृष्ण] के दो हाथ हैं और वे बांसुरी धारण करते हैं, जबकि दूसरे [नारायण] के चार हाथ हैं, जिनमें शंख, चक्र, गदा और कमल हैं।
 
This God (Shri Krishna) has two hands and holds a flute, while the other (Narayana) has four hands in which he holds a conch, a discus, a mace and a lotus.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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