| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 1: आदि लीला » अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु » श्लोक 24 |
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| | | | श्लोक 1.2.24  | वेद, भागवत, उपनिषत्, आगम ।
‘पूर्ण - तत्त्व’ याँरे कहे, नाहि याँर सम ॥24॥ | | | | | | | अनुवाद | | भगवान् वे हैं जिन्हें वेदों, भागवत, उपनिषदों तथा अन्य दिव्य साहित्यों में परम सम्पूर्ण कहा गया है। उनके समान कोई नहीं है। | | | | The Supreme Lord is the One who is described as the Supreme Absolute in the Vedas, Upanishads, and other divine literature. There is no one equal to Him. | | ✨ ai-generated | | |
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