श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.2.20 
अथ वा बहुनैतेन किं ज्ञातेन तवार्जुन ।
विष्टभ्याहमिदं कृत्स्नमेकांशेन स्थितो जगत् ॥20॥
 
 
अनुवाद
[भगवान श्री कृष्ण ने कहा:] "मैं तुमसे और क्या कहूँ? मैं इस ब्रह्माण्डीय जगत में केवल अपने पूर्ण अंश से ही निवास करता हूँ।"
 
[Lord Krishna said:] "What more can I say to you? I pervade this vast universe through only a part of myself."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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