श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  1.2.120 
चैतन्य - गोसाञि र एइ तत्त्व - निरूपण ।
स्वयं - भगवान्कृष्ण व्रजेन्द्र - नन्दन ॥120॥
 
 
अनुवाद
निष्कर्ष यह है कि भगवान चैतन्य, भगवान कृष्ण, व्रज के राजा के पुत्र हैं।
 
The conclusion is that Sri Chaitanya Mahaprabhu is the Supreme Personality of Godhead, Lord Krishna, the son of Vrajaraja Himself.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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