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श्लोक 1.2.116  |
सब श्रोता - गणेर करि चरण वन्दन ।
ए सब सिद्धान्त शुन, करि’ एक मन ॥116॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रवचन को सुनने या पढ़ने वाले सभी लोगों के चरणों में मेरा वंदन। कृपया इन सभी कथनों का निष्कर्ष ध्यानपूर्वक सुनें। |
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| I bow down to all who listen to or read this story. Please listen carefully to the essence of all these sayings. |
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