श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  1.2.115 
केहो कहे, पर - व्योमे नारायण हरि ।
सकल सम्भवे कृष्णे, याते अवतारी ॥115॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग उन्हें हरि या दिव्य जगत का नारायण कहते हैं। कृष्ण में सब कुछ संभव है, क्योंकि वे आदि भगवान हैं।
 
Some call Him Hari or Narayana of the transcendental realm. Everything is possible for Krishna, because He is the original Lord.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd