श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  1.2.113 
कृष्णके कहये केह - नर - नारायण ।
केहो कहे, कृष्ण हय साक्षावामन ॥113॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग कहते हैं कि श्रीकृष्ण प्रत्यक्षतः नर-नारायण हैं। अन्य कहते हैं कि वे प्रत्यक्षतः वामन हैं।
 
Some say that Shri Krishna is the real Nara-Narayana. Others say that he is the real Vamana.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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