vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु
»
श्लोक 111
श्लोक
1.2.111
सेइ त’ भक्तेर वाक्य नहे व्यभिचारी ।
सकल सम्भवे ताँते, याते अवतारी ॥111॥
अनुवाद
परन्तु एक सच्चे भक्त के मुख से निकले ऐसे शब्द झूठे नहीं हो सकते। सभी संभावनाएँ उनमें विद्यमान हैं, क्योंकि वे आदि भगवान हैं।
But such words, uttered by a sincere devotee, can never be false. They contain all possibilities, for He is the original Lord.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd