| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 1: आदि लीला » अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु » श्लोक 103 |
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| | | | श्लोक 1.2.103  | जीव - शक्ति तटस्थाख्य, नाहि यार अन्त ।
मुख्य तिन शक्ति, तार विभेद अनन्त ॥103॥ | | | | | | | अनुवाद | | "इन दोनों के बीच की सीमांत शक्ति असंख्य जीवों से बनी है। ये तीन प्रमुख शक्तियाँ हैं, जिनकी असीमित श्रेणियाँ और उपविभाग हैं।" | | | | "The neutral force between these two is made up of countless beings. These are the three primary forces, which have countless variations and sub-types. | | ✨ ai-generated | | |
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