न तस्य कार्यं करणं च विद्यते
न तत्समश्चाभ्यधिकश्चा दृश्यते
परास्य शक्तिर विविधैव श्रूयते
स्वाभाविकी ज्ञान-बल-क्रिया च
"परम प्रभु दूसरे के बिना एक है। उसे व्यक्तिगत रूप से कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं है, न ही उसके पास भौतिक इंद्रियाँ हैं। कोई भी उसके बराबर या उससे बड़ा नहीं है। उसके पास विभिन्न नामों की असीमित, विभित्र शक्तियाँ हैं, जो स्वायत्त गुणों के रूप में उसके भीतर मौजूद हैं और उसे पूर्ण ज्ञान, शक्ति और आनंद प्रदान करते हैं।"
