श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  1.17.93 
नृसींह - आवेश दे खि’ महा - तेजोमय ।
पथ छा ड़ि’ भागे लोक पाञा बड़ भय ॥93॥
 
 
अनुवाद
भगवान नृसिंह के आनंद में उन्हें अत्यंत भयंकर रूप में देखकर लोग उनके क्रोध से भयभीत होकर सड़क से भागकर इधर-उधर भागने लगे।
 
Seeing him in a very terrifying form in the rage of Lord Narasimha and frightened by his anger, people ran here and there on the streets.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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