श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  1.17.90 
एक - दिन प्रभु श्रीवासेरे आज्ञा दिल ।
‘बृहत्सहस्र - नाम’ पड़, शुनिते मन हैल ॥90॥
 
 
अनुवाद
एक दिन भगवान ने श्रीवास ठाकुर को बृहत् सहस्रनाम [भगवान विष्णु के हजार नाम] पढ़ने का आदेश दिया, क्योंकि वे उस समय उन्हें सुनना चाहते थे।
 
One day Mahaprabhu asked Srivasa Thakura to recite the Brihat Sahasranama (Vishnu Sahasranama) as Mahaprabhu felt like listening to it at that time.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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