प्रभु के अनुयायियों को ब्राह्मणों को पूरा सम्मान देने के लिये तत्पर रहना चाहिए। किंतु भगवान चैतन्य के पंथ के प्रचारक इस बात का विरोध करते हैं कि कोई आवश्यक योग्यताओं के बिना स्वयं को ब्राह्मण कहे। भगवान चैतन्य के अनुयायी अंधाधुंध यह स्वीকার नहीं कर सकते कि ब्राह्मण परिवार में जन्मा प्रत्येक व्यक्ति ब्राह्मण है। अतः किसी को अपने चरण-प्रक्षालित जल का पान करके ब्राह्मणों का सम्मान करने के प्रभु के उदाहरण का अंधाधुंध पालन नहीं करना चाहिए। कलि-युग के दूषित प्रभाव के कारण धीरे-धीरे ब्राह्मण परिवारों का ह्रास हो गया है। इसलिए वे लोगों की भावानाओं का शोषण करके उन्हें गुमराह करते हैं।
