Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93
Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
अनुवाद
जो भी श्रद्धालु व्यक्ति इस ब्राह्मण द्वारा भगवान चैतन्य को दिए गए श्राप के बारे में सुनता है, वह सभी ब्राह्मणीय श्रापों से मुक्त हो जाता है।
Any devotee who listens to that Brahmin saying that Mahaprabhu is cursing him, gets freed from all the Brahma curses.
तात्पर्य
मनुष्य को निश्चित निष्कर्ष के साथ यह जानना चाहिए कि प्रभु, विलक्षण होने के कारण, कभी भी किसी श्राप या वरदान के अधीन नहीं होते। केवल साधारण जीवित प्राणी ही श्राप और यमराज के दंड के अधीन होते हैं। भगवान का सर्वोच्च व्यक्तित्व होने के नाते, श्री चैतन्य महाप्रभु ऐसे दंड और वरदान से परे हैं। जब कोई व्यक्ति इस तथ्य को विश्वास और प्रेम के साथ समझ जाता है, तो वह व्यक्तिगत रूप से ब्राह्मणों या किसी अन्य द्वारा उच्चारित सभी श्रापों से मुक्त हो जाता है। यह घटना चैतन्य-भागवत में वर्णित नहीं है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥