श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.17.48 
ग्राम - सम्बन्धे आमि तोमार मातुल ।
भागिना, मुइ कुष्ठ - व्याधिते हजाछि व्याकुल ॥48॥
 
 
अनुवाद
"मेरे प्यारे भांजे, मैं गाँव के रिश्ते में तुम्हारा मामा हूँ। देखिये, इस कुष्ठ रोग ने मुझे कितना कष्ट पहुँचाया है।
 
"My nephew, I'm like your uncle in the village. Look how this leprosy attack has afflicted me."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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