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अनुवाद
"सज्जनों, मैं प्रतिदिन रात्रि में देवी भवानी की पूजा करता हूँ। चूँकि पूजा की सामग्री यहाँ मौजूद है, इसलिए अब आप सभी सम्मानित ब्राह्मण और उच्च जातियों के लोग मेरी स्थिति समझ सकते हैं।"
"My gentlemen, I worship Goddess Bhavani every night. Since all the materials for worship are present here, all respected Brahmins and members of the upper castes, you can understand my situation."
तात्पर्य
वैदिक व्यवस्था के अनुसार चार जातियाँ हैं - ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र - और उनके नीचे पंचम (शाब्दिक अर्थ, "पांचवें वर्ग के सदस्य") हैं, जो शूद्रों से भी निम्न हैं। उच्च जातियाँ - ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य भी - ब्राह्मण-सज्जन के रूप में जानी जाती थीं। ब्राह्मण विशेष रूप से सज्जन के रूप में जाने जाते थे, या सम्मानित सज्जन जो पूरे समाज का मार्गदर्शन करते थे। यदि गाँव में विवाद होते थे, तो लोग इन सम्मानित ब्राह्मणों के पास उन्हें सुलझाने के लिए जाते थे। अब ऐसे ब्राह्मणों और सज्जनों को ढूंढना बहुत कठिन है, और इसलिए हर गाँव और शहर इतना बाधित है कि कहीं भी शांति और खुशी नहीं है। पूरी तरह से सुसंस्कृत सभ्यता को पुनर्जीवित करने के लिए, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रों में समाज का वैज्ञानिक विभाजन पूरी दुनिया में शुरू किया जाना चाहिए। जब तक कुछ लोगों को ब्राह्मण के रूप में प्रशिक्षित नहीं किया जाता, मानव समाज में शांति नहीं हो सकती।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥