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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.17.35 
कपाट दिया कीर्तन करे परम आवेशे ।
पाषण्डी हासिते आइसे, ना पाय प्रवेशे ॥35॥
 
 
अनुवाद
यह उत्साहपूर्ण जप दरवाजे बंद करके किया गया ताकि मज़ाक करने आए अविश्वासी लोग प्रवेश न कर सकें।
 
This soulful kirtan was performed with the doors closed so that unbelievers who came with the intention of mocking could not enter.
तात्पर्य
हरे कृष्ण महा-मंत्र का जाप सबके लिए खुला है, लेकिन कभी-कभी अविश्वासी जाप के अनुष्ठान में हस्तक्षेप करने आते हैं। ऐसे हालात में, यह संकेत दिया जाता है कि मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाएँ। केवल वास्तविक जप करने वालों को ही प्रवेश दिया जाना चाहिए; अन्य लोगों को नहीं। लेकिन जब हरे कृष्ण महा-मंत्र का बड़े पैमाने पर सामूहिक जाप किया जाता है, तो हम अपने मंदिर सभी के लिए खुले रखते हैं कि सभी शामिल हो सकें और भगवान चैतन्य महाप्रभु की कृपा से, इस नीति ने अच्छे परिणाम दिए हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)