| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 1: आदि लीला » अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ » श्लोक 331 |
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| | | | श्लोक 1.17.331  | श्री - कृष्ण - चैतन्य - लीला - अद्भुत, अनन्त ।
ब्रह्मा - शिव - शेष याँर नाहि पाय अन्त ॥331॥ | | | | | | | अनुवाद | | भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु की लीलाएँ अद्भुत और असीम हैं। यहाँ तक कि भगवान ब्रह्मा, भगवान शिव और शेषनाग जैसे व्यक्तित्व भी उनका अंत नहीं पा सकते। | | | | The divine pastimes of Sri Chaitanya Mahaprabhu are astonishing and endless. Even the likes of Brahma, Shiva, and Sheshnag cannot fathom them. | | ✨ ai-generated | | |
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