श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 321
 
 
श्लोक  1.17.321 
अष्टमे ‘चैतन्य - लीला - वर्णन’ कारण ।
एक कृष्ण - नामेर महा - महिमा - कथन ॥321॥
 
 
अनुवाद
आठवें अध्याय में भगवान चैतन्य की लीलाओं का वर्णन किया गया है। इसमें भगवान कृष्ण के पवित्र नाम की महिमा का भी वर्णन है।
 
The reason for describing the pastimes of Sri Chaitanya is given in the eighth chapter.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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