श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 317
 
 
श्लोक  1.17.317 
चतुर्थे कहिलूँ जन्मेर ‘मूल’ प्रयोजन ।
स्व - माधुर्य - प्रेमानन्द - रस - आस्वादन ॥317॥
 
 
अनुवाद
चौथे अध्याय में उनके प्रकट होने का मुख्य कारण बताया गया है, जो उनकी दिव्य प्रेममयी सेवा तथा उनकी मधुरता का रसास्वादन करना है।
 
The fourth chapter describes the main reason for His appearance, which is to enjoy His divine love and to taste the essence of His sweetness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)