श्री-रूप-रघुनाथ-पदे यार आशा
चैतन्य-चरितामृत कहे कृष्णा दास
"श्री रूप और श्री रघुनाथ के चरण कमलों की वंदना करते हुए, हमेशा उनकी दया की कामना करते हुए, मैं, कृष्णदास इस श्री चैतन्य चरितामृत का वर्णन कर रहा हूँ, उनके पदचिह्नों का अनुसरण करते हुए।"
नरोत्तम दास ठाकुर के एक गीत में कहा गया है:
रूप-रघुनाथ-पदे ह-इबे आकुति
कबे हम बुझाबा से युगल-प्रीति
राधा और कृष्ण के बीच का प्रेम, जिसे युगल-प्रीति कहा जाता है, सांसारिक विद्वानों, कलाकारों या कवियों द्वारा समझ में नहीं आता। यह केवल उन भक्तों द्वारा समझा जा सकता है जो छह गोस्वामियों के पदचिन्हों का कड़ाई से पालन करते हैं। कई बार तथाकथित कलाकार और कवि राधा और कृष्ण के प्रेम संबंधों को समझने की कोशिश करते हैं, वे किताबों में कविताएँ लिखते हैं और इस विषय पर तस्वीरें प्रकाशित करते हैं। दुर्भाग्यवश, हालाँकि, वे राधा और कृष्ण के पारलौकिक मामलों को जरा भी नहीं समझ पाते। वे केवल ऐसे मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं जिसमें उनके प्रवेश योग्य नहीं है।
