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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 304
 
 
श्लोक  1.17.304 
सेइ कृष्ण, सेइ गोपी , - परम विरोध ।
अचिन्त्य चरित्र प्रभुर अति सुदुर्बोध ॥304॥
 
 
अनुवाद
वे कृष्ण हैं, फिर भी उन्होंने गोपियों के भाव को स्वीकार कर लिया है। ऐसा कैसे? यह भगवान का अकल्पनीय चरित्र है, जिसे समझना अत्यंत कठिन है।
 
He is Krishna, yet He has assumed the form of a gopi. Why is this? This is the inconceivable nature of the Lord, one that is extremely difficult to understand.
तात्पर्य
कृष्ण द्वारा गोपियों का पात्र स्वीकार करना सांसारिक गणना के अनुसार निश्चित रूप से विरोधाभासी है, लेकिन भगवान अपने अविश्वसनीय चरित्र के द्वारा गोपियों की तरह कार्य कर सकते हैं और कृष्ण से अलग होने का भाव महसूस कर सकते हैं, हालाँकि वो स्वयं कृष्ण ही हैं। इस तरह के विरोधाभास का सामंजस्य केवल ईश्वर के परम व्यक्तित्व में ही किया जा सकता है क्योंकि उनकी ऐसी अविश्वसनीय (अचिंत्य) उर्जा है जो असंभव को भी संभव बना सकती है (अघट-घटना-पतियासी)। ऐसे विरोधाभास को समझना तब तक बहुत मुश्किल है जब तक एक भक्त गोस्वामियों के निर्देशन में रहे वैष्णव दर्शन का कड़ाई से पालन ना करे। इसलिए कृष्णदास कविराज गोस्वामी हर अध्याय को इस श्लोक से समाप्त करते हैं:

श्री-रूप-रघुनाथ-पदे यार आशा

चैतन्य-चरितामृत कहे कृष्णा दास

"श्री रूप और श्री रघुनाथ के चरण कमलों की वंदना करते हुए, हमेशा उनकी दया की कामना करते हुए, मैं, कृष्णदास इस श्री चैतन्य चरितामृत का वर्णन कर रहा हूँ, उनके पदचिह्नों का अनुसरण करते हुए।"

नरोत्तम दास ठाकुर के एक गीत में कहा गया है:

रूप-रघुनाथ-पदे ह-इबे आकुति

कबे हम बुझाबा से युगल-प्रीति

राधा और कृष्ण के बीच का प्रेम, जिसे युगल-प्रीति कहा जाता है, सांसारिक विद्वानों, कलाकारों या कवियों द्वारा समझ में नहीं आता। यह केवल उन भक्तों द्वारा समझा जा सकता है जो छह गोस्वामियों के पदचिन्हों का कड़ाई से पालन करते हैं। कई बार तथाकथित कलाकार और कवि राधा और कृष्ण के प्रेम संबंधों को समझने की कोशिश करते हैं, वे किताबों में कविताएँ लिखते हैं और इस विषय पर तस्वीरें प्रकाशित करते हैं। दुर्भाग्यवश, हालाँकि, वे राधा और कृष्ण के पारलौकिक मामलों को जरा भी नहीं समझ पाते। वे केवल ऐसे मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं जिसमें उनके प्रवेश योग्य नहीं है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)