श्री चैतन्य महाप्रभु, अद्वैत प्रभु और नित्यानंद प्रभु, सभी विष्णु-तत्व श्रेणी से संबंध रखते हैं। क्योंकि भगवान चैतन्य दया के एक सागर हैं, उन्हें महाप्रभु कहकर संबोधित किया जाता है, जबकि नित्यानंद और अद्वैत, भगवान चैतन्य की सहायता करने वाले दो महान व्यक्तित्व, प्रभु कहलाते हैं। इस तरह से दो प्रभु और एक महाप्रभु हैं। गदाधर गोस्वामी एक पूर्ण ब्राह्मण गुरु का प्रतिनिधि है। श्रीवास ठाकुर एक संपूर्ण ब्राह्मण भक्त का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन पांचों को पंच-तत्व के रूप में जाना जाता है।
