श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 297
 
 
श्लोक  1.17.297 
प्रेम - भक्ति दिया तेंहो भासा’ ल जगते ।
ताँर चरित्र लोके ना पारे बुझिते ॥297॥
 
 
अनुवाद
श्री नित्यानंद प्रभु ने दिव्य प्रेममयी सेवा प्रदान करके सम्पूर्ण जगत को अभिभूत कर दिया। उनके चरित्र और कार्यकलापों को कोई नहीं समझ सकता।
 
Sri Nityananda Prabhu flooded the entire world with his divine love and devotion. No one can understand his character and his actions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)