श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 271
 
 
श्लोक  1.17.271 
भारती कहेन, तुमि ईश्वर, अन्तर्यामी ।
ये कराह, से करिब , - स्वतन्त्र नहि आमि ॥271॥
 
 
अनुवाद
केशव भारती ने भगवान को उत्तर दिया, "आप पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान हैं, परमात्मा हैं। आप मुझसे जो भी करवाएँगे, मुझे वही करना होगा। मैं आपसे स्वतंत्र नहीं हूँ।"
 
Keshav Bharati replied to Mahaprabhu, "You are the Supreme Lord, the Supreme Being. I will do only what you ask me to do. I am not independent of you."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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