Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93

Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 253
 
 
श्लोक  1.17.253 
पड़या सहस्र याहाँ पड़े एक - ठाजि ।
प्रभुर वृत्तान्त द्विज कहे ताहाँ याइ ॥253॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण छात्र दौड़कर उस स्थान पर पहुँचा जहाँ एक हज़ार छात्र एक साथ अध्ययन कर रहे थे। वहाँ उसने उन्हें सारी घटना बताई।
 
The Brahmin student ran to a place where a thousand students were studying together. He described the incident to them.
तात्पर्य
इस श्लोक में हमें द्विज शब्द मिलता है, जो दर्शाता है कि छात्र एक ब्राह्मण था। दरअसल उन दिनों वैदिक साहित्य में केवल ब्राह्मण वर्ग के सदस्य ही छात्र बनते थे। विद्यालय आना-जाना खास तौर पर ब्राह्मणों के लिए था; पहले क्षत्रियों, वैश्यों या शूद्रों के लिए विद्यालय आने-जाने का कोई सवाल ही नहीं था। क्षत्रिय युद्ध तकनीक सीखा करते थे, और वैश्य व्यापार अपने पिता या अन्य व्यापारियों से सीखा करते थे; उनका काम वेदों का अध्ययन करना नहीं था। हालाँकि, आजकल हर कोई स्कूल जाता है, और सभी को एक ही तरह की शिक्षा दी जाती है, यद्यपि कोई नहीं जानता कि इसका परिणाम क्या होगा। हालाँकि, परिणाम ज्यादातर असंतोषजनक है, जैसा कि हमने खास तौर पर पश्चिमी देशों में देखा है। संयुक्त राज्य अमेरिका में विशाल शैक्षणिक संस्थान हैं जहाँ हर किसी को शिक्षा पाने की इजाजत है, लेकिन नतीजा यह है कि ज्यादातर छात्र हिप्पी जैसे बन जाते हैं।

उच्च शिक्षा सभी के लिए नहीं है। केवल ब्राह्मणिक संस्कृति में प्रशिक्षित कुछ चुनिंदा व्यक्तियों को ही उच्च शिक्षा लेने की इजाजत दी जानी चाहिए। शिक्षण संस्थानों का लक्ष्य तकनीक नहीं सिखाना चाहिए, क्योंकि किसी टेक्नोलॉजिस्ट को ठीक ढंग से शिक्षित नहीं कहा जा सकता। टेक्नोलॉजिस्ट एक शूद्र है; केवल वही जो वेदों का अध्ययन करता है उसे वास्तव में विद्वान व्यक्ति (पंडित) कहा जा सकता है। एक ब्राह्मण का कर्तव्य वैदिक साहित्य में विद्वान बनना और अन्य ब्राह्मणों को वैदिक ज्ञान सिखाना है। हमारे कृष्णभावनामृत आंदोलन में हम अपने छात्रों को केवल एक योग्य ब्राह्मण और वैष्णव बनना सिखा रहे हैं। डलास में हमारे विद्यालय में, छात्र अंग्रेजी और संस्कृत सीख रहे हैं, और इन दो भाषाओं के जरिए हमारी सारी पुस्तकों का अध्ययन कर रहे हैं, जैसे कि श्रीमद्भागवतम्, भगवद्गीता अस इट इज़ और भक्ति रसामृत सिंधु। हर छात्र को एक टेक्नोलॉजिस्ट के तौर पर शिक्षित करना गलती है। छात्रों का एक समूह ऐसा होना चाहिए जो ब्राह्मण बनें। वैदिक साहित्य का अध्ययन करने वाले ब्राह्मणों के बगैर मानव समाज पूरी तरह अराजक होगा।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)