श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 249
 
 
श्लोक  1.17.249 
कृष्ण - नाम ना लओ केने, कृष्ण - नाम - धन्य ।
‘गोपी’ ‘गोपी’ बलिले वा किबा हय पुण्य ॥249॥
 
 
अनुवाद
"आप भगवान कृष्ण के पवित्र नाम, जो इतना महिमावान है, के स्थान पर 'गोपी गोपी' नाम क्यों जप रहे हैं? ऐसे जप से आपको कौन-सा पुण्य फल प्राप्त होगा?"
 
"Why are you calling out, 'Gopi, Gopi,' instead of chanting the glorious and holy name of Lord Krishna? What merit will you gain by doing so?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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