जो व्यक्ति किसी महापुरुष के चरण कमलों की धूल लेता है, वह अपने पाप कर्मों को उस महापुरुष पर स्थानांतरित कर देता है। जब तक जिस व्यक्ति की धूल ली जाती है वह बहुत मजबूत नहीं होता, उसे धूल लेने वाले व्यक्ति के पाप कर्मों को भोगना पड़ता है। इसलिए आमतौर पर इसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। कभी-कभी बड़ी सभाओं में लोग हमारे पैर छूकर वैसा ही लाभ लेने आते हैं। इस वजह से कभी-कभी हमें किसी बीमारी से भी जूझना पड़ता है। जहाँ तक संभव हो, किसी बाहरी व्यक्ति को अपने पैर छूकर उनसे धूल लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। श्री चैतन्य महाप्रभु ने व्यक्तिगत रूप से अपने उदाहरण से यह दिखाया, जैसा कि अगले श्लोक में बताया गया है।
