दाढर्य लागि’ ‘हरेर्नाम’ - उक्ति तिन - वार ।
जड़ लोक बुझाइते पुनः ‘एव’ - कार ॥23॥
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अनुवाद
“इस श्लोक में ज़ोर देने के लिए ‘एव’ [‘निश्चय ही’] शब्द को तीन बार दोहराया गया है, और आम लोगों को समझाने के लिए इसमें ‘हरेर नाम’ [‘भगवान का पवित्र नाम’] भी तीन बार दोहराया गया है।
In this verse, the word eva (certainly) is repeated three times for emphasis and harernam (holy name of the Lord) is also repeated three times so that common people can understand it.
तात्पर्य
किसी साधारण व्यक्ति के लिए किसी चीज पर ज़ोर देने के लिए, कोई उसे तीन बार दोहरा सकता है, जैसे कोई कह सकता है, "तुमको ये करना ही पड़ेगा! तुमको ये करना ही पड़ेगा! तुमको ये करना ही पड़ेगा!" इस प्रकार, बृहन्नाराडीय पुराण पवित्र नाम के जाप पर बार-बार ज़ोर देता है ताकि लोग इसे गंभीरता से लें और इस प्रकार माया के चंगुल से खुद को मुक्त कर सकें। कृष्ण चेतना आंदोलन में दुनिया भर में हमारा व्यावहारिक अनुभव है कि लाखों लोग नियमित रूप से और निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार हरि कृष्ण महा-मंत्र का जाप करके जीवन के आध्यात्मिक स्तर पर वास्तव में आ रहे हैं। इसलिए, हमारे सभी छात्रों से हमारा अनुरोध है कि वे हर रोजँ इस हरिनाम महा-मंत्र की कम-से-कम सोलह मालाएँ बिना किसी अपराध के, विनियमित सिद्धांतों का पालन करके जप करें। इस प्रकार, उनकी सफलता निस्संदेह सुनिश्चित होगी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥