vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ
»
श्लोक 224
श्लोक
1.17.224
कीर्तन करिते प्रभु करिला गमन ।
सङ्गे चलि’ आइसे काजी उल्लसित मन ॥224॥
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु कीर्तन करने के लिए वापस चले गए और काजी भी प्रसन्न मन से उनके साथ चले गए।
Sri Chaitanya Mahaprabhu went to perform kirtan and the Qazi also went with him with a happy heart.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×