तोमार मुखे कृष्ण - नाम, - ए बड़ विचित्र ।
पाप - क्षय गेल, हैला परम पवित्र ॥217॥
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अनुवाद
"तुम्हारे मुख से निकले कृष्ण के पवित्र नाम के जाप ने अद्भुत कार्य किया है—इसने तुम्हारे सभी पाप कर्मों के फल नष्ट कर दिए हैं। अब तुम परम पवित्र हो गए हो।"
"The utterance of Krishna's holy name from your mouth has performed a miracle. It has eradicated the effects of all your sinful actions. You are now completely pure.
तात्पर्य
मान्यता के आंदोलन की शक्तिशालीता की पुष्टि करते हुए, भगवान चैतन्य महाप्रभु के मुंह से निकले इन शब्दों से पता चलता है कि कैसे लोग केवल भगवान कृष्ण के पवित्र नाम का जाप करके ही शुद्ध हो सकते हैं। काजी एक मुस्लिम म्लेच्छ या मांस-भक्षक था, लेकिन क्योंकि उसने कई बार भगवान कृष्ण के पवित्र नाम का उच्चारण किया, स्वचालित रूप से उसके पापपूर्ण जीवन के परिणामों को निष्फल कर दिया गया और वह भौतिक दोष से पूरी तरह शुद्ध हो गया। हम नहीं जानते कि वर्तमान समय के पाषंड क्यों विरोध करते हैं कि हम कृष्ण चैतन्य को दुनिया भर में फैलाकर और सभी स्तर के पुरुषों को वैष्णववाद के सर्वोच्च मापदंड का दावा करते हुए हिंदू धर्म का ह्रास कर रहे हैं। लेकिन ये बदमाश हमसे इतनी जोरदार असहमति जताते हैं कि उनमें से कुछ यूरोपीय और अमेरिकी वैष्णवों को विष्णु के मंदिरों में प्रवेश नहीं करने देते। धर्म को भौतिक लाभ का साधन मानकर, ये तथाकथित हिंदू वास्तव में असंख्य रूपों की उपासना करके दुष्ट हो गए हैं। अगली कविता में श्री चैतन्य महाप्रभु काजी के शुद्धिकरण की पुष्टि करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥