श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.17.21 
हरेर्नाम हरेर्नाम हरेर्नामेव केवलम् ।
कलौ नास्त्येव नास्त्येव नास्त्येव गतिरन्यथा ॥21॥
 
 
अनुवाद
“‘इस कलियुग में आत्म-साक्षात्कार के लिए पवित्र नाम जपने, पवित्र नाम जपने, भगवान हरि के पवित्र नाम जपने के अलावा कोई अन्य साधन, कोई अन्य साधन नहीं है।’
 
“In this Kaliyuga, there is no other way, no other way, no other way for self-realization except chanting the holy name of the Lord, chanting the holy name of the Lord, chanting the holy name of the Lord.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)