श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 181
 
 
श्लोक  1.17.181 
मोर बुके नख दिया घोर - स्वरे बले ।
फाड़िमु तोमार बुक मृदङ्ग बदले ॥181॥
 
 
अनुवाद
“सिंह ने अपने नाखून मेरी छाती पर गड़ाकर गम्भीर स्वर में कहा, ‘जैसे तुमने मृदंग का ढोल तोड़ा है, वैसे ही मैं तुम्हारी छाती भी फाड़ डालूँगा!
 
“The lion dug his nails into my chest and said in a terrifying voice, ‘Since you broke the drum, I am going to tear your chest apart right now.’”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)