श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 175
 
 
श्लोक  1.17.175 
काजी बले - सभे तोमाय बले ‘गौरहरि’ ।
सेइ नामे आमि तोमाय सम्बोधन करि ॥175॥
 
 
अनुवाद
काजी ने कहा, "सब लोग आपको गौरहरि कहते हैं। कृपया मुझे आपको इसी नाम से पुकारने दीजिए।"
 
The Qazi said, "Everyone calls you Gaurahari. Please let me call you by that name too."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas