श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 166
 
 
श्लोक  1.17.166 
गो - अङ्गे यत लोम, तत सहस्र वत्सर ।
गो - वधी रौरव - मध्ये पचे निरन्तर ॥166॥
 
 
अनुवाद
“गौ-हत्यारों को उतने ही हजार वर्षों तक नारकीय जीवन में सड़ने के लिए अभिशप्त किया जाता है, जितने गाय के शरीर पर बाल होते हैं।
 
“Those who slaughter cows have to rot in hell for as many thousand years as there are hairs on the body of that cow.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)