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श्लोक 1.17.136  |
आगे सम्प्रदाये नृत्य करे हरिदास ।
मध्ये नाचे आचार्य - गोसाञि परम उल्लास ॥136॥ |
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| अनुवाद |
| आगे वाले दल में ठाकुर हरिदास नृत्य कर रहे थे, और बीच वाले दल में अद्वैत आचार्य बड़े हर्षोल्लास के साथ नृत्य कर रहे थे। |
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| Thakur Haridas was dancing in front of the group and Advaita Acharya was dancing with great joy in the middle of the group. |
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