श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  1.17.128 
आर यदि कीर्तन करिते लाग पाइमु ।
सर्वस्व दण्डिया तार जाति ये लइमु ॥128॥
 
 
अनुवाद
“अगली बार जब मैं किसी को ऐसा संकीर्तन करते देखूंगा, तो मैं निश्चित रूप से उसकी सारी संपत्ति जब्त करके उसे दंडित करूंगा, साथ ही उसे मुसलमान भी बना दूंगा।”
 
“If next time I see anyone doing such Sankirtan, as a punishment I will not only confiscate all his property but will also convert him to Islam.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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