प्रभुर अभिषेक तबे करिल श्रीवास ।
खाटे व सि’ प्रभु कैला ऐश्वर्य प्रकाश ॥11॥
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अनुवाद
तत्पश्चात् श्रीवास ठाकुर ने अभिषेक विधि द्वारा भगवान चैतन्य महाप्रभु की पूजा की। भगवान ने चारपाई पर बैठकर दिव्य ऐश्वर्य का प्रदर्शन किया।
Srivasa Thakura then performed the anointment of Chaitanya Mahaprabhu. While seated on the cot, Mahaprabhu radiated divine splendor.
तात्पर्य
अभिषेक देवता को स्थापित करने का एक विशेष कार्य है। इस समारोह में देवता को दूध और पानी से स्नान कराया जाता है और फिर पूजा और वस्त्र बदल दिया जाता है। यह अभिषेक कार्य विशेष रूप से श्रीवास के घर पर मनाया जाता था। सभी भक्त, अपने साधनों के अनुसार, प्रभु की सभी प्रकार के सामग्रियों से पूजा करते थे, और प्रभु प्रत्येक भक्त को उसकी इच्छा के अनुसार आशीर्वाद देते थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥