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श्री चैतन्य चरितामृत
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श्लोक 108
श्लोक
1.17.108
पूर्व जन्मे छिला तुमि जगताश्रय ।
परिपूर्ण भगवान् सर्वैश्वर्यमय ॥108॥
अनुवाद
“हे मेरे प्रिय महोदय, पूर्वजन्म में आप समस्त सृष्टि के आश्रय, समस्त ऐश्वर्यों से परिपूर्ण भगवान थे।
O Lord, in your previous life you were the Lord, the refuge of the entire creation, full of all opulences.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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