Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93

Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  1.17.104 
के आछि लुँ आमि पूर्व जन्मे कह गणि’ ।
गणिते लागिला सर्वज्ञ प्रभु - वाक्य शुनि’ ॥104॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, "कृपया मुझे बताएँ कि मैं पिछले जन्म में कौन था।" "कृपया अपनी ज्योतिषीय गणनाओं से मुझे बताएँ।" भगवान की बात सुनकर ज्योतिषी ने तुरंत गणना शुरू कर दी।
 
Mahaprabhu asked, “Please tell me, using your astrological calculations, who I was in my previous life?” Hearing this from Mahaprabhu, the astrologer immediately began his calculations.
तात्पर्य
ज्योतिष के द्वारा अतीत, वर्तमान और भविष्य जाना जा सकता है। आधुनिक पश्चिमी ज्योतिषियों को अतीत या भविष्य का कोई ज्ञान नहीं है, न ही वे वर्तमान के बारे में कुछ भी ठीक से कह सकते हैं। हम यहां पाते हैं, हालांकि, कि श्री चैतन्य महाप्रभु की आज्ञा सुनने के बाद, ज्योतिषी ने तुरंत अपनी गणना शुरू कर दी। यह कोई दिखावा नहीं था: वह वास्तव में जानता था कि ज्योतिष के माध्यम से किसी के पिछले जीवन का पता कैसे लगाया जाए। भृगु-संहिता नामक एक अभी भी मौजूद ग्रंथ एक ऐसी प्रणाली का वर्णन करता है जिसके द्वारा कोई भी व्यक्ति तुरंत इस बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है कि वह अतीत में क्या था और भविष्य में क्या होने जा रहा है। भीख मांगने वालों की तरह घर-घर जाने वाले ब्राह्मणों को इस तरह के विशाल ज्ञान का पूर्ण आदेश था। इस प्रकार सर्वोच्च ज्ञान समाज के सबसे गरीब व्यक्ति के लिए भी आसानी से उपलब्ध था। गरीब व्यक्ति व्यवसायिक समझौतों या अत्यधिक भुगतान की कोई आवश्यकता के बिना अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य के बारे में एक ज्योतिषी से पूछ सकता था। ब्राह्मण उसे अपने ज्ञान का पूरा लाभ बिना पारिश्रमिक मांगे देता था, और गरीब आदमी बदले में, ब्राह्मण को संतुष्ट करने के लिए उसे मुट्ठी भर चावल, या उसके पास जो कुछ भी था, भेंट करता था। एक आदर्श मानव समाज में, किसी भी विज्ञान में पूर्ण ज्ञान - चिकित्सीय, ज्योतिषीय, आध्यात्मिक आदि - गरीब से गरीब आदमी के लिए भी उपलब्ध होता है, भुगतान को लेकर कोई चिंता नहीं होती। वर्तमान समय में, हालांकि, कोई भी बिना पैसे के न्याय, चिकित्सा उपचार, ज्योतिषीय मदद या आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता है, और चूंकि लोग आम तौर पर गरीब हैं, वे इन सभी महान विज्ञानों के लाभों से वंचित हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)