श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  1.16.85 
प्रतिभा, कवित्व तोमार देवता - प्रसादे ।
अविचार काव्ये अवश्य पड़े दोष - बाधे ॥85॥
 
 
अनुवाद
"आपने अपने पूज्य देव की कृपा से काव्यात्मक कल्पना और सरलता प्राप्त की है। लेकिन जिस कविता की अच्छी तरह से समीक्षा नहीं की जाती, वह निश्चित रूप से आलोचना का विषय होती है।"
 
"You have been blessed with poetic imagination and talent by the grace of your deity. But if poetry is not properly reviewed, it will surely be criticized."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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