श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  1.16.78 
‘लक्ष्मीरि व’ अर्थालङ्कार - उपमा - प्रकाश ।
आर अर्थालङ्कार आछे, नाम - ‘विरोधाभास’ ॥78॥
 
 
अनुवाद
"'लक्ष्मीर् इव' ['लक्ष्मी के समान'] शब्दों का प्रयोग उपमा [सादृश्य] नामक अर्थ अलंकार को प्रकट करता है। इसके अतिरिक्त एक और अर्थ अलंकार है जिसे विरोधाभास, या विरोधाभासी संकेत कहा जाता है।"
 
"Lakshmiriv (like Lakshmi) has a figure of speech called simile. Another figure of speech is paradox."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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