श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  1.16.73 
शब्दालङ्कार - तिन - पादे आछे अनुप्रास ।
‘श्री - लक्ष्मी’ शब्दे ‘पुनरुक्तवदाभास’ ॥73॥
 
 
अनुवाद
तीन पंक्तियों में अनुप्रास का एक अलंकार है। और 'श्री' और 'लक्ष्मी' शब्दों के मेल में एक प्रकार की अतिशयता का अलंकार है।
 
Three lines of the stanza contain the figure of speech called alliteration. The compound of the words "Shri" and "Lakshmi" contains the figure of speech called repetition.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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