श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  1.16.72 
पञ्च अलङ्कारेर एबे शुनह विचार ।
दुइ शब्दालङ्कार, तिन अर्थ - अलङ्कार ॥72॥
 
 
अनुवाद
"अब पाँच साहित्यिक अलंकारों का वर्णन सुनो। दो शब्द अलंकार हैं और तीन अर्थ अलंकार हैं।
 
"Now listen to a description of five literary figures of speech. Two are figures of speech and three are figures of speech."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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