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श्लोक 1.16.7  |
विविध औद्धत्य करे शिष्य - गण - सङ्गे ।
जाह्नविते जल - केलि करे नाना रङ्गे ॥7॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान ने गुरु के रूप में गंगा के जल में क्रीड़ा-लीला करते हुए अनेक प्रकार की लीलाएँ कीं। |
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| When Mahaprabhu was a teacher, he used to play various kinds of games in the waters of Ganga. |
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