श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.16.7 
विविध औद्धत्य करे शिष्य - गण - सङ्गे ।
जाह्नविते जल - केलि करे नाना रङ्गे ॥7॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने गुरु के रूप में गंगा के जल में क्रीड़ा-लीला करते हुए अनेक प्रकार की लीलाएँ कीं।
 
When Mahaprabhu was a teacher, he used to play various kinds of games in the waters of Ganga.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas