श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  1.16.65 
‘ब्राह्मण - पत्नीर भर्तार हस्ते देह दा न’ ।
शब्द शुनितेइ हय द्वितीय - भर्ता ज्ञान ॥65॥
 
 
अनुवाद
“यदि कोई कहे, ‘यह दान ब्राह्मण की पत्नी के पति के हाथ में रख दो,’ तो जब हम ये विरोधाभासी शब्द सुनते हैं तो हम तुरंत समझ जाते हैं कि ब्राह्मण की पत्नी का दूसरा पति है।
 
“If someone says, ‘Give this donation to the husband of the Brahmin's wife,’ then on hearing these opposite words, we immediately understand that the Brahmin's wife also has another husband.”
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas