श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  1.16.64 
‘शिव - पत्नीर भर्ता’ इहा शुनिते विरुद्ध ।
‘विरुद्ध - मति - कृत्’ शब्द शास्त्रे नहे शुद्ध ॥64॥
 
 
अनुवाद
"यह सुनना विरोधाभासी है कि भगवान शिव की पत्नी का दूसरा पति है। साहित्य में ऐसे शब्दों का प्रयोग विरुद्ध-मति-कृत नामक दोष उत्पन्न करता है।"
 
"It seems contradictory to hear that Shiva's wife has another husband. The use of such words in literature creates a flaw called virudhamatikrit."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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