श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.16.53 
कवि कहे , - कह देखि, कोन् गुण - दोष ।
प्रभु कहेन, कहि, शुन, ना करिह रोष ॥53॥
 
 
अनुवाद
कवि ने कहा, "ठीक है, मुझे देखने दो कि तुमने क्या अच्छे गुण और क्या दोष पाए हैं।" भगवान ने उत्तर दिया, "मुझे बोलने दो, और कृपया बिना क्रोधित हुए मेरी बात सुनो।" भगवान ने उत्तर दिया, "मुझे बोलने दो, और कृपया बिना क्रोधित हुए मेरी बात सुनो।"
 
The poet said, "Just look at the merits and demerits you have found." Mahaprabhu replied, "I am telling you. Please listen without getting angry."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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